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खशाबा जाधव ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कुश्ती का कांस्य जीता, जो स्वतंत्र भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक था, लंदन में छठे स्थान पर रहने के चार साल बाद
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खशाबा जाधव ने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कुश्ती का कांस्य जीता, जो स्वतंत्र भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक था, लंदन में छठे स्थान पर रहने के चार साल बाद

चित्रण: tuput

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सतारा ज़िले के गोलेश्वर गाँव के पहलवान जाधव ने 23 जुलाई 1952 को हेलसिंकी में 20 पहलवानों के मुक़ाबले में बैंटमवेट फ़्रीस्टाइल का कांस्य जीता। ओलिम्पीडिया उन्हें 1948 के लंदन खेलों में छठे स्थान पर दर्ज करता है। दिसंबर 2023 में महाराष्ट्र ने घोषणा की कि उनका जन्मदिन, 15 जनवरी, हर साल राज्य खेल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

· · 9 मिनट का पठन

खशाबा दादासाहेब जाधव ने 23 जुलाई 1952 को हेलसिंकी ओलंपिक में बैंटमवेट फ़्रीस्टाइल का कांस्य जीता, उस वर्ग में उतरे 20 पहलवानों में से एक के रूप में, जिसे ओलिम्पीडिया (ओलंपिक इतिहासकारों की रखी डेटाबेस) 57 किलो तक का परिभाषित करता है। सरकार का प्रेस कार्यालय, प्रेस इन्फ़ॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी), इसे स्वतंत्र भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक कहता है। चार साल पहले, 1948 के लंदन खेलों में, वे फ़्लाईवेट वर्ग में 11 में से छठे स्थान पर रहे थे।

गोलेश्वर के एक पहलवान का बेटा

पीआईबी और ओलिम्पीडिया के अनुसार जाधव का जन्म महाराष्ट्र के सतारा ज़िले की कराड तहसील के गाँव गोलेश्वर में हुआ। तारीख़ स्रोत के हिसाब से बदलती है। गूगल की श्रद्धांजलि और समाचार एजेंसी आईएएनएस 15 जनवरी 1926 देते हैं, ओलिम्पीडिया 15 नवंबर 1926 देता है, और पीआईबी की 2010 की प्रोफ़ाइल 15 जनवरी 1925 देती है। ओलिम्पीडिया, पीआईबी और आईएएनएस तीनों उनकी मृत्यु 14 अगस्त 1984 को बताते हैं।

उनके पिता दादासाहेब पहलवान थे और उन्होंने उन्हें यह खेल सिखाया, पीआईबी और गूगल दोनों कहते हैं। ओलिम्पीडिया उनकी ऊँचाई 165 सेंटीमीटर दर्ज करता है। गूगल के वृत्तांत के अनुसार उनका ख़ास दाँव ढाक था, एक हेडलॉक जिसके बाद ज़मीन पर पटकना होता है, और गूगल और पीआईबी दोनों उनका उपनाम दर्ज करते हैं, पॉकेट डायनमो।

1948 के लंदन के लिए कोल्हापुर के महाराजा ने यात्रा का ख़र्च दिया, ईएसपीएन और गूगल बताते हैं। ओलिम्पीडिया की तालिकाएँ 11 पहलवानों वाला एक नया वज़न वर्ग दिखाती हैं, जिसमें अंक ऋणात्मक में गिने जाते थे और पाँच अंक पर बाहर होना होता था। जाधव ने 29 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के बर्ट हैरिस को 3-0 के निर्णय से और 30 जुलाई को अमेरिका के बिली जर्निगन को 3-0 के निर्णय से हराया। उसी दिन बाद में ईरान के मंसूर रईसी ने चित करके (पिन से) जीत ली, जिससे जाधव पाँच अंक पर पहुँचकर बाहर हो गए, छठे स्थान पर।

पीआईबी की 2010 की प्रोफ़ाइल लंदन में चार शुरुआती जीतें बताती है, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के पहलवानों पर। ओलिम्पीडिया की राउंड-तालिकाएँ दो जीत और एक हार दिखाती हैं, और यह लेख ओलिम्पीडिया का अनुसरण करता है।

7,000 रुपये और गिरवी रखा एक घर

हेलसिंकी के लिए, पीआईबी कहता है कि जाधव ने आरोप लगाया कि मद्रास की राष्ट्रीय चैंपियनशिप में अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विजेता से एक अंक कम दिया था, और उन्होंने पटियाला के महाराजा से अपील की, जिन्होंने एक परीक्षण मुक़ाबला करवाया जो उन्होंने जीता। द ब्रिज एक ऐसा रूप देता है जिसमें भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष और पटियाला के महाराजा यादवेंद्र सिंह ने पहलवान निरंजन दास के साथ मुक़ाबला करवाया। ईएसपीएन दास पर एक जीत को 1948 में लखनऊ का बताता है।

पैसा इसके बाद आया। कोल्हापुर के राजाराम कॉलेज के प्राचार्य ने अपना घर 7,000 रुपये में गिरवी रखा, इस पर पीआईबी, ईएसपीएन और द ब्रिज सहमत हैं। ईएसपीएन उनका नाम आर. खरडीकर लिखता है, और पीआईबी इसे खरडेकर लिखता है। पीआईबी जोड़ता है कि गोलेश्वर के दुकानदारों ने उन्हें राशन और दूसरी चीज़ें दीं। ईएसपीएन बताता है कि खेलों के बाद जाधव ने खरडीकर को घर वापस ख़रीदने के पैसे जुटाने के लिए एक कुश्ती टूर्नामेंट करवाया।

हेलसिंकी, 20 से 23 जुलाई 1952

इस मुक़ाबले का ओलिम्पीडिया का पन्ना कहता है कि 1948 के चैंपियन, तुर्की के नासुह अकार, पसंदीदा होते पर 1952 की शुरुआत में संन्यास ले चुके थे। अंकन में चित करके जीत के 0 अंक थे, तीन निर्णायकों के निर्णय से जीत के 1, और किसी भी हार के 3। पाँच अंक पर पहलवान बाहर हो जाता था, हालाँकि पदक दौर में पहुँचा पहलवान आगे खेल सकता था।

ओलिम्पीडिया की राउंड-तालिकाओं से जाधव का रिकॉर्ड:

  • 20 जुलाई, पहला राउंड: कनाडा के एड्रियन पोलिक्वन को 14:25 पर चित करके हराया।
  • 21 जुलाई, दूसरा राउंड: मेक्सिको के लियोनार्दो बसुर्तो को 5:20 पर चित करके हराया।
  • 22 जुलाई, तीसरा राउंड: जर्मनी के फ़र्डिनांड श्मिट्ज़ को 2-1 के निर्णय से हराया।
  • 22 जुलाई, चौथा राउंड: बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के दर्ज, और उनका स्कोर 1 रहा।
  • 23 जुलाई, पाँचवाँ राउंड: सोवियत संघ के रशीद ममदबेयोव (ओलिम्पीडिया नाम Rəşid Məmmədbəyov लिखता है) से 3-0 के निर्णय से हारे।
  • 23 जुलाई, छठा राउंड: जापान के शोहाची इशी से 3-0 के निर्णय से हारे।

इससे वे 7 अंक पर तीसरे स्थान पर रहे। ओलिम्पीडिया की तालिका में अंतिम मैच में ममदबेयोव को हराने के बाद इशी स्वर्ण जीतता है, और सोवियत पहलवान रजत लेता है। ईएसपीएन और द ब्रिज कहते हैं कि जाधव ने अपने पहले पाँच मुक़ाबले जीते, जो ओलिम्पीडिया की तालिका से मेल नहीं खाता। शुरुआती राउंडों पर जहाँ स्रोत अलग हैं, ऊपर की तालिका वह है जिसमें हर मुक़ाबले की तारीख़ और नतीजा है।

एक दिन में दो मुक़ाबले

ओलिम्पीडिया जाधव की दोनों हारें 23 जुलाई को दर्ज करता है और शुरू होने का कोई समय नहीं देता। ईएसपीएन और पीआईबी दिन को ओलिम्पीडिया के क्रम से अलग तरह बताते हैं। दोनों इशी वाले मुक़ाबले को पहले रखते हैं, और दोनों कहते हैं कि अगले मुक़ाबले से पहले, जो सोवियत पहलवान के ख़िलाफ़ था, जाधव को कम से कम आधे घंटे का आराम मिलना चाहिए था। माँगने के लिए कोई भारतीय अधिकारी वहाँ नहीं था, वे कहते हैं, और ईएसपीएन लिखता है कि थकान में वे आसानी से हार गए।

राष्ट्रीय सेवा योजना, जो युवा मामले और खेल मंत्रालय के अधीन है, जाधव पर एक टिप्पणी रखती है जिसमें कहा गया है कि दोनों मुक़ाबलों के बीच कोई अंतराल नहीं था। इशी वाले मुक़ाबले का पीआईबी का वृत्तांत (वह कहता है कि इशी के लुढ़कने वाले फ़ाउल जाधव के पक्ष में दंडित किए गए) और एनएसएस की टिप्पणी (वह स्वर्ण चूकने से पहले दो लुढ़कने वाले फ़ाउल का ज़िक्र करती है) एक-दूसरे से मेल नहीं खाते, और न ही ओलिम्पीडिया के 3-0 के नतीजे से।

नतीजे पर सारे वृत्तांत सहमत हैं। जाधव उस वर्ग के आख़िरी दिन दो बार कुश्ती लड़े और कांस्य लेकर आए।

बैलगाड़ियाँ, ढोल और पुलिस की नौकरी

लौटने पर बैलगाड़ियों का जुलूस उन्हें गाँव से होकर ले गया। पीआईबी कराड से गोलेश्वर तक 101 गाड़ियाँ गिनता है, द ब्रिज 100 कहता है, और ईएसपीएन और एनएसएस की टिप्पणी ढोल बजाने वालों के साथ 151 कहते हैं। एनएसएस की टिप्पणी कहती है कि गाँव के किनारे से महादेव मंदिर तक जुलूस में सात घंटे लगे, उस रास्ते के लिए जो सामान्यतः 15 मिनट में तय होता है।

राष्ट्रीय कवरेज कम थी, पीआईबी और द ब्रिज दोनों कहते हैं। द ब्रिज जोड़ता है कि भारतीय हॉकी टीम के स्वर्ण ने ज़्यादातर ध्यान ले लिया, और ओलिम्पीडिया पुष्टि करता है कि उन खेलों में भारतीय पुरुषों ने हॉकी का स्वर्ण जीता। tuput का पेरिस 2024 में भारत के हॉकी कांस्य का वृत्तांत टीम के पहले के ओलंपिक पदक साल-दर-साल सूचीबद्ध करता है। पीआईबी मुंबई के दादर में शिवाजी मंदिर हॉल में एक छोटे सम्मान समारोह को दर्ज करता है।

जाधव 1955 में महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती हुए और 1983 में सेवानिवृत्त हुए, पीआईबी, द ब्रिज और लाइव हिस्ट्री इंडिया के अनुसार। द ब्रिज और लाइव हिस्ट्री इंडिया दोनों कहते हैं कि एक चोट ने उन्हें 1956 के मेलबर्न खेलों से बाहर रखा, और गूगल कहता है कि घुटने की चोट ने उनका कुश्ती करियर ख़त्म किया। उनका निधन 14 अगस्त 1984 को कराड के पास एक मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुआ, ओलिम्पीडिया कहता है।

1900 के रजत पदक और “पहले” शब्द

पीआईबी की विज्ञप्ति उनके पदक को एक लंबी कड़ी में रखती है। 1900 के बाद, जब नॉर्मन प्रिचर्ड ने एथलेटिक्स में दो रजत पदक जीते थे, भारत ने सिर्फ़ फ़ील्ड हॉकी में टीम स्वर्ण जीता था, वह कहती है। जाधव स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता थे, और 1996 में लिएंडर पेस के कांस्य जीतने तक वे अकेले रहे।

ओलिम्पीडिया प्रिचर्ड के 1900 के दो रजत भारत के अंतर्गत सूचीबद्ध करता है और नोट करता है कि ब्रिटेन भी उन पर दावा करता है। वह इतिहासकार इयान बुकानन का हवाला देता है, जो कहते हैं कि प्रिचर्ड ब्रिटिश थे, और गुलू एज़ेकिएल का, जो भारतीय दावे को उनके भारत में जन्म और वहाँ बिताए वर्षों पर टिकाते हैं। 1952 के मुक़ाबले पर ओलिम्पीडिया का अपना पन्ना जाधव के पदक को भारत के किसी एथलीट का जीता पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक कहता है। tuput पीआईबी के शब्द इस्तेमाल करता है, स्वतंत्र भारत का पहला, जो दोनों पाठों में टिकता है। बाद के व्यक्तिगत पदकों में नीरज चोपड़ा का 7 अगस्त 2021 को टोक्यो में भाला फेंक का स्वर्ण है, जो tuput के चोपड़ा के करियर के रिकॉर्ड में दर्ज है।

सम्मान, दिल्ली के एक स्टेडियम से राज्य क्रीडा दिवस तक

महाराष्ट्र ने उनके निधन के बाद उन्हें अपना छत्रपति पुरस्कार दिया। गूगल और आईएएनएस इसे 1992 से 1993 का बताते हैं, पीआईबी 1993 कहता है, और ईएसपीएन 1994 कहता है। युवा मामले और खेल मंत्रालय “स्वर्गीय श्री के. डी. जाधव”, कुश्ती, को 2000 के अर्जुन पुरस्कार विजेताओं में, जीवनपर्यंत योगदान वर्ग में, सूचीबद्ध करता है, और पीआईबी वही वर्ष देता है। कुछ समाचार रिपोर्टें 2001 कहती हैं।

6 जुलाई 2010 को खेल मंत्री एम. एस. गिल ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम परिसर में उस साल के कॉमनवेल्थ खेलों के एक स्थल, नए कुश्ती स्टेडियम का नाम के. डी. जाधव कुश्ती स्टेडियम रखा। पीआईबी कहता है कि उनके बेटे रणजीत जाधव मौजूद थे, उन्हें एक शॉल और चाँदी की पट्टिका दी गई, और उन्हें खिलाड़ियों के राष्ट्रीय कल्याण कोष से 3 लाख रुपये (300,000 रुपये) मिले।

28 मई 2022 को खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में खशाबा जाधव स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया, पीआईबी बताता है। यह 27 एकड़ में फैला है और इसके प्रवेश पर जाधव की आदमक़द कांस्य प्रतिमा है। गूगल ने 15 जनवरी 2023 को उनके 97वें जन्मदिन पर एक डूडल बनाया। 30 दिसंबर 2023 को, आईएएनएस ने बताया, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और युवा कल्याण मंत्री संजय बनसोडे ने घोषणा की कि 15 जनवरी हर साल राज्य खेल दिवस होगा, 15 जनवरी 2024 से शुरू करके। भारतीय फ़िल्म में कुश्ती की बाद की जगह tuput के दंगल और फोगाट बहनों पर लेख में है।

पद्म की याचिका

जाधव को कोई पद्म पुरस्कार नहीं मिला है, उनके बेटे ने जनवरी 2020 में पीटीआई से कहा जब उन्होंने भारत रत्न, या कम से कम मरणोपरांत पद्म, की माँग की। रणजीत जाधव द्वारा स्थापित कुस्तीवीर खशाबा जाधव फ़ाउंडेशन इसके बाद यह मामला जनहित याचिका 100 (2025) के रूप में बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ में ले गया। 15 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति माधव जामदार और प्रवीण पाटिल ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मरणोपरांत पद्म विभूषण पर 4 मई 2026 को या उससे पहले निर्णय ले, लाइवलॉ और द डेली पायनियर बताते हैं।

इंडियाविज़न ने 16 मई 2026 को बताया, राज्य सरकार के क़रीबी अनाम सूत्रों के हवाले से, कि महाराष्ट्र ने पद्म विभूषण का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। 12 अक्टूबर 2026 तक tuput को केंद्र के निर्णय की कोई प्रकाशित रिपोर्ट नहीं मिली। 15 अप्रैल 2026 का आदेश दर्ज करता है: “यह निर्विवाद है कि खशाबा दादासाहेब जाधव भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता हैं।”

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स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

  1. Olympedia: Khashaba Jadhav, athlete biography and Olympic results
  2. Olympedia: Bantamweight, Freestyle (up to 57 kg), Men, Helsinki 1952, round-by-round results
  3. Olympedia: Flyweight, Freestyle (up to 52 kg), Men, London 1948, round-by-round results
  4. Olympedia: India at the 1952 Summer Olympics
  5. Olympedia: Norman Pritchard, athlete biography and 1900 results
  6. Press Information Bureau, Ministry of Youth Affairs and Sports, 6 July 2010: New Wrestling Stadium Named as K.D. Jadhav Wrestling Stadium
  7. Press Information Bureau, Mumbai, 28 May 2022: Anurag Thakur inaugurates Khashaba Jadhav Sports Complex of the Pune University
  8. Ministry of Youth Affairs and Sports: List of Arjuna Awardees (entry for 2000, Late Shri K.D. Jadhav, wrestling)
  9. National Service Scheme, Ministry of Youth Affairs and Sports: Olympics Bronze Medal, Helsinki 1952 (note on Khashaba Jadhav)
  10. Google Doodles: Khashaba Dadasaheb Jadhav's 97th Birthday (15 January 2023)
  11. ESPN, Sharda Ugra, 16 September 2019: No. 8, Khashaba Jadhav wins bronze at Helsinki Olympics
  12. The Bridge, 24 June 2024: KD Jadhav, 1952 Helsinki, India's first individual medal
  13. Live History India: K D Jadhav, the lonely fight for an Olympic first
  14. IANS via Sakshi Post, 30 December 2023: Maharashtra to celebrate Olympian K.D. Jadhav's birthday as State Sports Day
  15. The Bridge (PTI), 30 January 2020: Not even a Padma award for India's first Olympic medallist, regrets son
  16. LiveLaw, 20 April 2026: Bombay High Court asks Centre to decide plea for posthumously conferring Padma Vibhushan on Olympian Khashaba Jadhav
  17. The Daily Pioneer, 21 April 2026: Decide by May 4 on Padma Vibhushan to Olympian Jadhav, HC to Centre
  18. IndiaVision, 16 May 2026: Maharashtra government forwards proposal for Padma Vibhushan to Khashaba Jadhav

यह लेख AI उपकरणों की सहायता से शोधित और लिखा गया है, और सटीकता के लिए संपादित किया गया है। यह केवल सामान्य जानकारी और चर्चा के लिए है, पेशेवर सलाह नहीं। हमारे संपादकीय मानक और अस्वीकरण देखें। कोई त्रुटि मिली? हमें बताएँ।

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